20-02-2017
cba Foundation Survey Report
PART-1
समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जहाँ आजादी के इतने सालों बाद भी सरकारी
योजनाएं नहीं पहुंच पाई हैं। शिक्षा नहीं के बराबर है। आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े
हैं। बीमार हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। जागरूकता के अभाव के कारण अपने
अधिकारों और कर्तव्यों दोनों से वंचित हैं।
रेल की पटरियों के किनारे, नालों के किनारे एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के
अभाव वाली अनगिनत कॉलोनियाँ किसी भी शहर में आपको मिल जाएंगी। गैर सरकारी संगठन सीबा
फाउंडेशन (cba foundation) ने पिछले दिनों ऐसे ही कुछ इलाकों का दौरा
किया। सर्वे के दौरान जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक इन इलाकों में रहने वाले
ज्यादातर लोगों में शिक्षा का अभाव है, आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े हैं, स्वास्थ्य
के प्रति जागरूक नहीं हैं, परिवार नियोजन का उन्होंने अपने जीवन में कभी पालन नहीं
किया। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी भी सरकारी संस्था ने इन्हें इस बारे में
जागरूक करना मुनासिब नहीं समझा।
आर्थिक विपन्नता और इस अनुपात में परिवार के सदस्यों की ज्यादा संख्या ऐसे
परिवारों को कभी भी गरीबी, भुखमरी से उबरने नहीं देती। ऐसे परिवारों के ज्यादातर
बच्चे कुपोषण के शिकार पाए गए। संतुलित भोजन के अभाव में परिवार के वयस्क भी
अनगितन बीमारियों के ग्रस्त मिले। आर्थिक रूप से कमजोर इन वर्गों के ज्यादातर लोग झोलाछाप
डॉक्टरों के भरोसे होते हैं। अंतत: परिणाम यह होता है कि वे असमय मृत्यु के प्राप्त हो जाते हैं।
सीबा फाउंडेशन के अध्ययन में जो नतीजे समाने आए उसके मुताबिक ऐसे परिवारों
को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छता के अभाव में
ज्यादातर परिवारों में लोग गंदगी से होने वाली बीमारियों से ग्रस्त मिले। ऐसे
परिवारों की मासिक कमाई यदि 1000 रुपया है तो उसमें से करीब 400-500 रुपया उनकी
बीमारी में खर्च हो जाता है।
स्वच्छता के अभाव, शिक्षा के अभाव, स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता
के अभाव के कारण ज्यादातर परिवार आर्थिक रूप से ऊपर नहीं उठ पाते और आजादी के इतने
सालों बाद भी गरीबी और भुखमरी के शिकार हैं।




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