अपनी-अपनी स्माईल!
अग्रवाल किराना स्टोर वाले
गौरव से मैंने पूछा तुम्हारे जीवन का क्या उद्देश्य है? हँसमुख-सभ्य गौरव ने जवाब दिया- ‘स्माईल।‘ हमने सोचा ये क्या बोल रहा
है-यहाँ तो लोग अपने जीवन की
एक लंबी लिस्ट बनाकर रखते हैं और ये कह रहा है स्माईल? उसने और क्लियर किया- भैया
जी स्माईल दूसरों के चेहरे पर। अगर मेरे व्यवहार से सामने वाले का चेहरा खिल जाता
है तो मेरे लिए यह सबसे बड़ी खुशी है। मेरे जीवन का यही उद्देश्य है। अच्छी बातें
और जीवन जीने की कला सिर्फ डेल कारनेगी की किताबों में नहीं मिलती पर हम इतने
गुमान में होते हैं कि खुद को बंद करके रखते हैं। कहीं से कोई विचार हमारे भीतर
घुस भी न जाए। और ये दुकान वाला ये हमें क्या सिखाएगा जीवन जीने की कला? दरअसल गौरव की बात में जीवन
का असल अर्थ छुपा है।
परिवार और कुछ रिश्तेदार
मॉल में घूमने गए थे। मुझसे कहा गया अगर आपको नहीं चलना है तो कम से कम चार पांच
घंटे बाद हमें लेने चले आना। रात करीब 10 बजे तय समय और मुकाम पर पहुंच गया। मॉल
वाले AC में मस्त और बाहर ढेर सारे आने जाने वाले लोग गर्मी और उमस से पस्त। कार
पार्क करके AC चलाकर, लैटेस्ट गाने लगाकर बहुत से लोग सड़क के किनारे खड़े थे। मैं भी
उन्हीं जैसा उन्ही की तरह कतार में खड़ा हो गया। दूर चौराहे पर हमारी सुरक्षा में
पुलिस के दो जवान किनारे पड़ी ईंट पर बैठे थे। न तो वो मॉल मे थे और न ही कार में
थे। गर्मी में उन्हें भी सता रही थी। पसीने पोछे जा रहे थे। कार से उतरा मेरे पास
ठंडा एक बॉटल पानी था उन्हें कुछ अजीब सा ना लगे इसलिए उनके सामने खड़े होकर पहले
दो घूंट पीया फिर बॉटल उनकी तरफ बढ़ाते हुए कहा – “प्यास तो आपको भी लगी होगी
ना।“ उन्होंने हामी भरी और बॉटल अपने हाथ में लेकर जीभर पीया।
जब तक उनसे बात करता परिवार
और रिश्तेदार भी मॉल से बाहर आ गए। उन्होंने जी भर के शॉपिंग की थी। सब खुश थे उनके
चेहरे पर स्माईल थी।
पड़ोस वाले मिश्रा जी और
उनके बगल वाले गुप्ता जी भी खुश रहते हैं। मैंने कई बार उनके चेहरे पर स्माईल देखी
है। उनके बच्चे भी खुश रहते हैं। अच्छे कपड़े पहनते हैं। घर गाड़ी सबकुछ तो है
उनका अपना। उनके चेहरे पर स्माईल हो भी क्यों ना। बच्चे जो चाहते हैं उनको देकर
खुशी मिलती है। पत्नी भी खुश रोज नई नई साड़ी पहनने को मिलती है। मिश्रा जी खुद
महँगी घड़ी पहनते हैं इसकी स्माईल उनके चेहरे पर साफ झलकती है। इन दोनों परिवारों
के चेहरे पर सबसे ज्यादा स्माईल तब देखता हूँ- जब सप्ताह के आखिर में एक दिन सिविल
लाइन्स के पास वाले होटल और कटरा चौराहे वाले रेस्टोरेंट से डिनर करके आते हैं।
आखिर स्माईल के लिए ही तो कमा रहे हैं।
अभी अभी याद आया मिसेज यादव
भी सिंगापुर गई हैं। वो भी डॉक्टर हैं और उनके पति भी डॉक्टर। दो बच्चे। दोनों
खुश। बड़े स्कूल में पढ़ते हैं। कहा जाता है पूरे क्षेत्र के सबसे बड़े डॉक्टर
हैं। उनके पास काफी बड़े बड़े लोग आते हैं। बड़े डॉक्टर हैं इसलिए बड़ी फीस है। ये
डॉक्टर दम्पति अपनी स्माईल के लिए कोई समझौता नहीं करता। फिक्स है विंटर वकैशन हो या
समर - सपरिवार विदेश तो जाना ही है। मुझे लगता है अभी तो आधी उमर है एक तिहाई होते
होते दुनिया का एक बड़ा हिस्सा नाप चुके होंगे। अभी जब उन्होंने बड़ी गाड़ी खरीदी
थी तो मुझसे मिले थे उनके चेहरे पर स्माईल थी। घर तो उन्होंने दो साल पहले ही खरीद
लिया था।