गुरुवार, 14 अगस्त 2014


सी-सैट विवाद और नासमझ नेता
·        संतोष राय

सी-सैट को लेकर नेताओं के बहकावे में आ गए थे यूपीएससी के प्रतियोगी छात्र। उनसे कहा गया था कि बजट सत्र शुरू होने वाला है, अभी कुछ करोगे तो फायदा है नहीं तो सब बेकार। यही कारण था कि बजट सत्र शुरू होने के साथ ही साथ यूपीएससी छात्रों का आंदोलन शुरू हो गया। संसद में क्षेत्रीय दलों ने जोर शोर से इस मुद्दे को उठाया। संसद में मामले को उठाने वाले सांसदों को भी नहीं पता था कि आखिर मुद्दा है क्या? सरकार को सांसदों की बात से ये लगा जैसे अंग्रेजी बनाम हिंदी समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का मामला है। सरकार ने भी एक हफ्ते का समय लिया और कह दिया की ठीक है आठ सवालों वाले अंग्रेजी के प्रश्नों का अंक नहीं जोड़ा जाएगा और जो प्रतियोगी छात्र 2011 में परीक्षा में शामिल हो चुके हैं उन्हें एक और अवसर दिया जाएगा। इन सांसदों ने जैसा संदेश सरकार तक पहुंचाया सरकार ने उसका निराकरण कर दिया। सरकार के फैसले से नाखुश छात्रों ने कहा कि मामला तो ये था ही नहीं? छात्र आंदोलन जारी रखते हुए सी-सैट को ही हटाने की मांग पर अड़े रहे।
सी-सैट को लेकर प्रदर्शन करते यूपीएससी छात्र